क्या कुछ न किया है

क्या कुछ न किया है और क्या कुछ नहीं करते;
कुछ करते हैं ऐसा ब-खुदा कुछ नहीं करते;
अपने मर्ज़-ए-गम का हकीम और कोई है;
हम और तबीबों की दवा कुछ नहीं करते।

हम उम्मीदों की

हम उम्मीदों की दुनियां बसाते रहे;
वो भी पल पल हमें आजमाते रहे;
जब मोहब्बत में मरने का वक्त आया;
हम मर गए और वो मुस्कुराते रहे।

वो खुश दिली जो

बढ़ी जो हद से तो सारे तिलिस्म तोड़ गयी;
वो खुश दिली जो दिलों को दिलों से जोड़ गयी;
अब्द की राह पे बे-ख्वाब धड़कनों की धमक;
जो सो गए उन्हें बुझते जगो में छोड़ गयी।

एक पल में ज़िन्दगी भर की

एक पल में ज़िन्दगी भर की उदासी दे गया;
वो जुदा होते हुए कुछ फूल बासी दे गया;
नोच कर शाखों के तन से खुश्क पत्तों का लिबास;
ज़र्द मौसम बाँझ रुत को बे-लिबासी दे गया।

एक तुझको भूल जाने

सब कुछ मिला सुकून की दौलत न मिली;
एक तुझको भूल जाने की मोहलत न मिली;
करने को बहुत काम थे अपने लिए मगर;
हमको तेरे ख्याल से कभी फुर्सत न मिली।

ते रहे तुम भी

रोते रहे तुम भी, रोते रहे हम भी;
कहते रहे तुम भी और कहते रहे हम भी;
ना जाने इस ज़माने को हमारे इश्क़ से क्या नाराज़गी थी;
बस समझाते रहे तुम भी और समझाते रहे हम भी।

लगता नहीं है दिल मेरा

लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में;
किसकी बनी है आलम-ए-ना पैदार में;
कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें;
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दागदार में

दर्द होता है पर आवाज़ नहीं आती

साँस थम जाती है पर जान नहीं जाती;
दर्द होता है पर आवाज़ नहीं आती;
अजीब लोग हैं इस ज़माने में ऐ दोस्त;
कोई भूल नहीं पाता और किसी को याद नहीं आती।