भारत और पाकिस्तान में अंतर

भारत-

गूगल का CEO-भारतीय
माइक्रोसॉफ्ट का CEO-भारतीय
पेप्सिको का CEO-भारतीय
मास्टर कार्ड का CEO-भारतीय
डॉयचे बैंक का CO-CEO-भारतीय
जैगुआर,लैंड रोवर,रेंज रोवर के MD-भारतीय

पाकिस्तान-

अल-कायदा का CEO-पाकिस्तानी
लश्कर-ऐ-तैयबा का CEO-पाकिस्तानी
तालिबान का CEO-पाकिस्तानी
हिजबुल का CEO-पाकिस्तानी
जमात-उद-दावा का CEO-पाकिस्तानी
XYZ आतंकवादी ग्रुप्स के CEO-पाकिस्तानी !!!!!!!!! 😁😬😁😬

भैंस की व्यथा

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*भैंस की व्यथा*
*भैंस की जबान से*

बच्चा जब थोड़ा बड़ा होता
है , दूध *मेरा* पीता है,
वो भी बोर्नविटा डाल डाल कर ।
और
निबन्ध लिखने के लिये *गाय* *हाथी* या
*कुत्ते* ….. क्यों ?

अगर बच्चा लिख नहीं पाता
तो बोलते हैं ….
*काला अक्षर भैंस बराबर*
तो क्या दूसरे जानवर
*पोस्ट ग्रेजुएट* हैं ??

यदि कोई गल्ती करे तो लोग
कहते हैं कि *गई भैंस पानी में* .
बाकी के जानवर
क्या
*कोका कोला* में जाते हैं ?

कोई न सुने तो कहते हैं
*भैंस के आगे बीन बजाना*

बाकी के आगे क्या

*लता मंगेशकर* का गाना
बजाते हैं ?

*क्या बिगाड़ा है हमने*

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Har Har Mahadev

गुरु जी ने शिष्य से पूंछा -माता पार्वती ने भगवान शिव को वर क्यों चुना ? कारण सहित बताओ ।
शिष्य –
1-भगवान शिव कपडे नहीं पहनते थे इसलिए कपडे धोने का कोई लफढ़ा ही नहीं था ।
2-माथे पर चांद विद्यमान है ,लाइट ही लाइट बिजली जाने का डर नही।
3-जटाओं मे गंगाजी विराजती हैं पानी ही पानी , पम्प ख़राब होने की चिन्ता नहीं ।
4-कंद मूल फल जो भगवान शिव खाऐगै वही हम खाऐगे अर्थात खाना बनाने की जरूरत नही।
5-न सास न ननद मतलब कोई लडाई झगड़े का डर नहीं ।
गुरु जी सदमें में हैं ।
🍁🙏

पिंजरे का तोता

एक समय की बात हैं, एक सेठ और सेठानी रोज सत्संग में जाते थे। सेठजी के एक घर एक पिंजरे में तोता पाला हुआ था। तोता रोज सेठ-सेठानी को बाहर जाते देख एक दिन पूछता हैं कि सेठजी आप रोज कहाँ जाते है। सेठजी बोले कि भाई सत्संग में ज्ञान सुनने जाते है। तोता कहता है सेठजी फिर तो कोई ज्ञान की बात मुझे भी बताओ। तब सेठजी कहते हैं की ज्ञान भी कोई घर बैठे मिलता हैं। इसके लिए तो सत्संग में जाना पड़ता हैं। तोता कहता है कोई बात नही सेठजी आप मेरा एक काम करना। सत्संग जाओ तब संत महात्मा से एक बात पूछना कि में आजाद कब होऊंगा।
सेठजी सत्संग ख़त्म होने के बाद संत से पूछते है की महाराज हमारे घर जो तोता है उसने पूछा हैं की वो आजाद कब होगा? संत को ऐसा सुनते हीं पता नही क्या होता है जो वो बेहोश होकर गिर जाते है। सेठजी संत की हालत देख कर चुप-चाप वहाँ से निकल जाते है।
घर आते ही तोता सेठजी से पूछता है कि सेठजी संत ने क्या कहा। सेठजी कहते है की तेरे किस्मत ही खराब है जो तेरी आजादी का पूछते ही वो बेहोश हो गए। तोता कहता है कोई बात नही सेठजी में सब समझ गया।
दूसरे दिन सेठजी सत्संग में जाने लगते है तब तोता पिंजरे में जानबूझ कर बेहोश होकर गिर जाता हैं। सेठजी उसे मरा हुआ मानकर जैसे हीं उसे पिंजरे से बाहर निकालते है तो वो उड़ जाता है। सत्संग जाते ही संत सेठजी को पूछते है की कल आप उस तोते के बारे में पूछ रहे थे ना अब वो कहाँ हैं। सेठजी कहते हैं, हाँ महाराज आज सुबह-सुबह वो जानबुझ कर बेहोश हो गया मैंने देखा की वो मर गया है इसलिये मैंने उसे जैसे ही बाहर निकाला तो वो उड़ गया।
तब संत ने सेठजी से कहा की देखो तुम इतने समय से सत्संग सुनकर भी आज तक सांसारिक मोह-माया के पिंजरे में फंसे हुए हो और उस तोते को देखो बिना सत्संग में आये मेरा एक इशारा समझ कर आजाद हो गया।

इस कहानी से तात्पर्य ये है कि हम सत्संग में तो जाते हैं ज्ञान की बाते करते हैं या सुनते भी हैं, पर हमारा मन हमेशा सांसारिक बातों में हीं उलझा रहता हैं। सत्संग में भी हम सिर्फ उन बातों को पसंद करते है जिसमे हमारा स्वार्थ सिद्ध होता हैं। हमे वहां भी मान यश मिल जाये यही सोचते रहते हैं। जबकि सत्संग जाकर हमें सत्य को स्वीकार कर सभी बातों को महत्व देना चाहिये और जिस असत्य, झूठ और अहंकार को हम धारण किये हुए हैं उसे साहस के साथ मन से उतार कर सत्य को स्वीकार करना चाहिए।

~~ दिल से बोलो जी राधे राधे ~~
 

*एक कहानी जो मैंने फिर सुनी*

 

एक समय एक कछुये और एक खरगोश में इस बात पर बहस हो गई कि दोनों में कौन तेज दौड़ता है। दोनों ने तय किया कि इसका  समाधान एक दौड़ द्वारा किया जाय।  उन्होंने एक रास्ता  तय किया और दौड़ शुरु हुयी।

खरगोश आगे चल निकला और कुछ देर तेजी से दौड़ता रहा। फिर यह देख कर कि वह बहुत आगे आ गया है, उसने सोचा आगे दौड़ने के पहले किसी पेड़ के नीचे कुछ देर बैठ कर थोड़ा आराम कर ले।

वह एक पेड़ के नीचे बैठा और थोड़ी  ही देर में उसे नींद आ गयी।

कछुआ धीरे-धीरे चलता आया और उसके आगे निकल गया। उसने शीघ्र ही दौड़ समाप्त कर ली  और चैम्पियन बन गया।

खरगोश जगा और समझ गया कि वह दौड़  हार गया था।

कहानी से सीख:

धीमा किन्तु सतत्‌  कार्यरत्‌  विजयी होता है।

 

इस कहानी को ऐसे ही हम बचपन से सुनते आये हैं।

किन्तु कुछ दिन पहले मुझे किसी ने इस कहानी को एक नये और अधिक रुचिकर रूप में सुनाया।

यह इस प्रकार है…………

खरगोश दौड़  हार जाने से निराश था। उसने हार का दोष निवारण –  मूल कारण –  का विश्लेषण किया।उसने पाया कि वह दौड़ इसलिये हार गया क्योंकि वह अतिविश्वासी,लापरवाह और आलसी था।

यदि उसने अपनी जीत पहले से ही सुनिश्चित न मान ली होती, तो किसी तरह भी कछुआ उसे हरा न पाता। अत: उसने कछुये को दूसरी दौड़  के लिये चुनौती दी। कछुये ने इसे स्वीकार कर लिया।

इस बार खरगोश पूरी मुस्तैदी से दौड़ा  और बिना कहीं रुके हुये शुरू से अन्त तक दौड़ गया।

वह मीलों से जीत गया।

 

इस कहानी की सीख है:

“तेज और संगत कार्य करने वाला

व्यक्ति धीमे और दृढ़-संकल्प के साथ       काम करने वाले व्यक्ति को पीछे छोड़ देता है। ” 

यदि किसी संगठन में दो व्यक्ति हों; एक, व्यवस्थित एवं विश्वसनीय, किन्तु धीमा, तथा दूसरा, तेज और विश्वसनीय भी, तो तेज और विश्वसनीय व्यक्ति संगठनात्मक सीढ़ी धीमे,व्यवस्थित एवं विश्वसनीय व्यक्ति की अपेक्षा  तेजी से चढ़े  गा।

धीमा, व्यवस्थित एवं विश्वसनीय व्यक्ति अच्छा है; किन्तु तेज और विश्वसनीय व्यक्ति उससे बेहतर होता है।

किन्तु कहानी यहीं खत्म नहीं हो जाती।

कछुआ ने स्थिति पर विचार किया और पाया कि दौड़ के वर्तमान प्रारूप में वह खरगोश से किसी भी प्रकार जीत नहीं सकता। वह इस पर कुछ समय विचार करता रहा, और तब उसने खरगोश को एक थोड़े से अलग मार्ग पर दौड़ने के लिये ललकारा।

खरगोश ने इसे स्वीकार कर लिया।

दौड़ शुरू हुयी।

अपनी स्वयं की वचनबद्धता के साथ कि वह विश्वसनीय रूप से लगातार तेज दौड़ेगा, खरगोश ने दौड़ना शुरू किया और अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ता रहा जब तक कि वह एक चौड़ी नदी के किनारे नहीं पहुंच गया।

दौड़ पूरी होने वाली रेखा नदी के उस पार काफी आगे थी।

खरगोश बैठा-बैठा सोचने लगा कि अब क्या करे?

इस बीच कछुआ धीरे-धीरे ऊँचे-नीचे चलते-चलते पहुँच आया,नदी में घुसा, तैर कर दूसरी ओर गया और चल कर दौड़ पूरी कर ली।

 

इस कहानी से सीख?

“सबसे पहले अपनी विशेष – मुख्य क्षमता को पहचानिये और फिर खेल मैदान – कार्य क्षेत्र एवं शर्तों में – इस क्षमता के अनुसार परिवर्तन करिये।“

किसी समूह में, यदि आप एक अच्छे वक्ता हैं, ऐसे अवसर पैदा करिये जिसमें प्रस्तुतीकरण हों  और जिनके माध्यम से आप अपने वरिष्ठ अधिकरियों की नज़र में आ जायें।

यदि आप की ताकत विश्लेषण है, आप अनुसंधान का काम चुनिये, आख्या तैयार कीजिये और ऊपर भेजिये।

अपनी क्षमताओं के अनुरूप कार्य करने से आप न केवल अपने अधिकारियों की नज़र में आयेंगे बल्कि आप को विकसित होने तथा आगे बढ़ने के अनेक सुअवसर मिलें गे।

 

किन्तु कहानी अभी समाप्त नहीं हुयी है………

खरगोश और कछुआ अब तक काफी अच्छे दोस्त बन गये थे। दोनों ने मिलकर सोच विचार किया।

दोनों ने समझा कि पिछली दौड़ बेहतर दौड़ी जा सकती थी।

अत: उन्होंने तय किया कि आख़िरी दौड़ वे फिर से दौड़ेगे, पर इस बार एक टीम की भांति।

उन्होंने दौड़ शुरू की।

इस समय खरगोश कछुआ को अपनी पीठ पर नदीं के किनारे तक ले गया।

वहाँ से कछुआ ने प्रारम्भ किया। खरगोश को अपनी पीठ पर बैठाया और तैर कर दूसरे किनारे पहुँच गया।

नदी के दूसरे किनारे पहुँच कर खरगोश ने फिर कछुआ को अपनी पीठ पर बैठाया और दौड़ गया। अन्तिम रेखा पर दोनों साथ पहुँचे।

दोनों ने पहले की अपेक्षा बेहतर सन्तोष का अनुभव किया।

इस कहानी मिलने वाली सीख:

व्यक्तिगत रूप से प्रतिभाशाली होना तथा सशक्त मुख्य क्षमता रखना अच्छा है; किन्तु जब तक आप एक टीम के रूप में कार्य करने की क्षमता विकसित नहीं करते और टीम के अन्य सदस्यों की मुख्य क्षमताओं को स्वीकारते हुये उनका उपयोग करना नहीं सीखते आप सदैव अपनी क्षमता से कम परिणाम प्राप्त करेंगे क्योंकि सदैव ऐसी परिस्थितियाँ आयें गी जब आप अच्छा न कर सकें और दूसरा आप से बेहतर करने की क्षमता रखता हो।

टीम कार्य मुख्यत: स्थितिपरक नेतृत्व से सम्बन्धित है, जिसमें विशेष  क्षमता वाले व्यक्ति को  परिस्थिति विशेष में कार्य का नेतृत्व सौंप दिया जाता है।

 

इस कहानी से कई अन्य सीखें भी मिलती हैं………

ध्यान देने योग्य बात है कि न तो खरगोश ने और न ही कछुआ ने असफलता के बाद अपनी हार मान ली।

खरगोश ने असफलता के बाद अधिक मेहनत और लगन से कार्य किया।

कछुआ अपनी क्षमता के अनुरूप पहले से ही कार्य कर रहा था, अत: उसने अपनी योजना – Strategy – बदल दी।

जीवन में, जब असफलता की सम्भावना दिखे, अधिक मेहनत और लगन से कार्य करना उपयुक्त हो सकता है।

कभी-कभी कार्य योजना बदल कर कुछ भिन्न करना उपयुक्त हो सकता है। और कभी-कभी दोनों करना आवश्यक हो सकता है।

खरगोश और कछुआ ने एक दूसरी महत्वपूर्ण शिक्षा ग्रहण की:

“जब हम व्यक्ति विशेष से प्रतिस्पर्धा बन्द करके परिस्थिति से प्रतिस्पर्धा करना शुरू करते हैं तो हम बेहतर परिणाम प्राप्त करते हैं।“

सार रूप में, खरगोश और कछुआ की कहानी हमें कई सबक सिखाती है; उनमें से मुख्य हैं:

– तेज और विश्वसनीय सदैव धीमे और सतत कार्यरत को पीछे छोड देगा।

–  अपनी क्षमताओं के अनुरूप कार्य करिये।

– संसाधनों को एक साथ लेकर और एक टीम के रूप कार्य करने वाले अलग-अलग कार्य करने वालों को सदैव पीछे छोड़ देंगे।

–  असफलता के सामने कभी भी निराश मत होइये; और,अन्तिम,

-परिस्थिति के विरुद्ध प्रितिस्पर्धा करिये न कि प्रतिद्वनन्दी के विरुद्ध।

कफ़न

आज की लड़कियां …

एक शादीशुदा लड़की की सासू माँ मर गयी !
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वह अपने सहेली के साथ एक कपङे के दुकान पर कफन लेने गयी !
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बोली भैया कफन दिखाईए।

दुकानदार ने कफन दिखाया |
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लङकी – भैया और कलर का दिखाओ ना …
पिंक कलर का नहीं है क्या ?
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दुकानदार – बहन जी कफन ऐसा ही मिलता है !
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लङकी – कोई अच्छा कलर दिखाओ क्योंकि मेरी सासू माँ पहली बार मरी है।
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दुकानदार (गुस्से मे) – बहन जी यही कलर मिलेगा … लेना है तो लो या चली जाओ।
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लङकी – ठीक है दे दो।
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दुकानदार ने उनको कफ़न दे दिया और कुछ ऐसा देखा कि वह बेहोश हो गया!
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जानते हैं क्या देखा?
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दोनों लड़कियां कफन ओढ़कर सेल्फी ले रही हैं !!!!!!

कभी तो अपनी सोच बदलो

पागल खाने में नर्स एक पागल से : – मेरा दुपट्टा ऊतारो ! 😍
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पागल : – ओ. के. !😘
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नर्स : – अब मेरी कमीज भी ऊतारो !😍
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पागल : – ओ. के. !😍
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नर्स : – अब मेरी सलवार भी ऊतारो !😍
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पागल : – ओ. के. !😘
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नर्स : – अब मेरी पैन्टी भी ऊतारो !😒😍
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पागल : – ओ. के. !😍
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और आगे के लिये ध्यान रहे
कि
आईन्दा , मेरे कपड़े फिर कभी नहीं पहनना ?😔😡
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भाईयो , आज फिर आपकी सोच को
21 तोपो की सलामी !👌💪💪💪
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???????l??
कभी तो अपनी सोच बदलो,
तभी तो देश बदलेगा ! ?😋😝😂😂

ग्रुप ग्रुप खेल रहे हैं

कागज़ पे लिखी गज़ल, बकरी चबा गयी !
चर्चा पुरे शहर में हुई, के बकरी शेर खा गयी.
कुदरत का करिश्मा देखो
जो अपने पति की ना हुई वो
राजस्थान की सी.एम. है !
और जो अपनी पत्नी का नहीं हुआ
वो भारत का पी.एम. है ।
चाय से सुरु हुई थी ये सरकार…..
गाय पे अटक गई…
विकास की मम्मी रास्ते में कही भटक गई…..
पुलिस रिश्वत खा रही हैं
नेता माल खा रहे हैं
किसान जहर खा रहा है
जवान गोली खा रहा है
कौन कहता है कि भारत भूखा मर रहा है ।।।।
झाडू वाला मुख्यमंत्री है
चाय वाला प्रधानमंत्री हैं
12वी पास देश की शिक्षा मंत्री है
9 वी फेल बिहार का उपमुख्यमंत्री
अंगूठा टेक सरपंच
और हम ग्रेजुएट डिप्लोमा वाले
FACEBOOK WHATSAPP पर
ग्रुप ग्रुप खेल रहे हैं
😳😳😂😂😭😭😭😂

गुड़िया

एक प्राइमरी स्कूल की टीचर थी ! सुबह उसने बच्चोँ का टेस्ट लिया था और उनकी कापियां देखते-देखते उसके आंसू बहने लगे !
उसका पति वही लेटा टीवी देख रहा था उसने रोने का कारण पूछा !
टीचर बोली , ‘ सुबह मैने बच्चो को ‘मेरी सबसे बङी इच्छा ‘ विषय पर कुछ पंक्तियां लिखने को कहां था ! एक बच्ची ने लिखकर इच्छा जाहिर की है कि भगवान उसे टेलीविजन बना देँ ! ‘
यह सुनकर पतिदेव हंसने लगे !
टीचर बोली , ‘ आगे तो सुनो !
बच्ची ने लिखा हैँ- यदि मैँ टीवी बन जाऊंगा , तो घर मेँ मेरी एक खास जगह होगी और सारा परिवार मेरे इर्द-गिर्द रहेगा !
जब मैँ बोलुंगी , तो सारे लोग मुझे ध्यान से सुनेँगे ! मुझे रोका-टोका नहीँ जाएगा और न ही उल्टे सवाल होँगे !
जब मैँ टीवी बनूँगी, तो पापा आफिस से आने के बाद थके होने के बावजूद मेरे साथ बैठेँगे !
मम्मी को जब तनाव होगा , तो वे मुझे डांटेगी नही , बल्कि मेरे साथ रहना चाहेँगी ! मेरे बङे भाई बहनोँ के बीच मेरे पास रहने के लिए झगङा होगा !
यहां तक कि जब टीवी बंद रहेगा , तब भी उसकी अच्छी तरह देखभाल होगी ! और हां , टीवी के रुप मेँ मैँ सबको खुशी भी दे सकूँगी !’
यह सब सुनने के बाद पति के मुंह से यही निकला , ‘ हे भगवान ! बेचारी बच्ची … उसके मां-बाप तो उस पर जरा भी ध्यान नहीँ देते !’
टीचर पत्नी ने आंसू भरी आंखोँ से उसकी तरफ देखकर बोली , ‘जानते हो , यह बच्ची कौन हैँ ?
हमारी अपनी बेटी … हमारी गुड़िया !’
जरा सोचिए , यह गुड़िया कहीँ बच्ची तो नहीं !

विनम्रता शीघ्र उन्नति की कुंजी है

पेट में गया जहर एक व्यक्ति को मारता है जबकि
कान में गया जहर सैकड़ों रिश्ते को मारता है।।
🌹 🌹 Good Evening 🌹 🌹

Great India

भारत के बारे में 12 ऐसे तथ्य जो मजाकिया होने के साथ सच भी है।
1. भारत एक ऐसा देश है जो कई स्थानीय भाषाओ द्वारा विभाजित है और एक विदेशी भाषा द्वारा एकजुट।
2. भारत मे लोग ट्रैफिक सिग्नल की रेड लाइट पर भले ही ना रुके लेकिन अगर एक काली बिल्ली रास्ता काट जाए हो हजारो लोग लाइन में खड़े हो जाते है। अब तो लगता है ट्रैफिक पुलिस में भी काली बिल्लियों की भर्ती करनी पड़ेगी।
3. चीन अपनी सरकार की वजह से तरक्की कर रहा है और भारत में तरक्की ना होने का सबसे बड़ा कारण उसकी अपनी सरकारें ही रही हैं।
4. भारत का मतदाता वोट देने से पहले उम्मीदवार की जात देखता है ना की उसकी योग्यता। अब इन लोगों को कौन समझाये की भाई तुम देश के लिए नेता ढूंढ रहे हो ना की अपने लिए जीजा।
5. भारत एक ऐसा देश है जहाँ एक्टर्स क्रिकेट खेल रहे है, क्रिकेटर्स राजनीति खेल रहे है, राजनेता पोर्न देख रहे है और पोर्न स्टार्स एक्टर बन रहे है।
6. भारत में आप जुगाड़ से करीब-करीब सब कुछ पा सकते है।
7. हम एक ऐसे देश में रहते है जहाँ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने से पहले लगभग कोई भारतीय नहीं जानता था की कैलाश सत्यार्थी कौन है। लेकिन अगर एक रशियन टेनिस खिलाडी हमारे देश के एक क्रिकेटर को नही जानती तो ये हमारे लिए अपमान की बात है।
8. भारत गरीब लोगो का एक अमीर देश है। भारत की जनता ने दो फिल्मों बाहुबली और बजरंगी भाईजान पर 700 करोड़ खर्च कर दिए।
9. भारत में किसी अनजान से बात करना खतरनाक है, लेकिन किसी अनजान से शादी करना बिलकुल ठीक।
10. हम भारतीय अपनी बेटी की पढ़ाई से ज्यादा खर्च बेटी की शादी पे कर देते है।
11. हम एक ऐसे देश में रहते है जहाँ एक पुलिसवाले को देखकर लोग सुरक्षित महसूस करने की वजाए घबरा जाते है।
12. हम भारतीय हेलमेट सुरक्षा के लिहाज से कम, चालान के डर से ज्यादा पहनते है
हंसी तो तब आती है
जब माल्या को इंडिया मे नही पकड पाते।
और बाते दाऊद को पाकिस्तान से लाने की करते हैं।

Great India,Great India