Mobile आया

ले ले ले ले ले ले ले रे Chal बेटा Selfie ले ले रे..

⊂_ヽ
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   \( •_•)
     ⌒ヽ
   /   へ\
   /  / \\ 📷
   レ ノ   ヽ_つ
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ノ )  Lノ
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😄☺😉😎😎
📲 Mobile आया
📷 Camera खतम

📲 Mobile आया
⏰ Wrist Watch खतम

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🔦 Torch खतम

📲 Mobile आया
📻 Radio खतम

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🔊 MP3 खतम

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📝 Letters खतम

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📟 Calculator खतम

📲Mobile आया
💻 Computer खतम

📲 Mobile आया
🙇 सुकून खतम

और अगर आप का

“Mobile” 📲
आप के

बीबी के हाथ में आया, मां कसम
आप “खतम” 🔫🙅
…..🎩
@ 👀👂
( 👃 )
\ 👅 /
✋🎽c👍
👖
/ \
👞👞
एक दम नया …😜

बदलती दुनियां का ऐसा असर होने लगा,
आदमी पागल😔Aur फोन Smart होने लगा है।
😀😊

क्या टेक्नोलॉजी है

इस भारत के झंडे को केवल दो ग्रुप में भेजें और जादू देखें
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आपके मोबाइल मे राष्ट्रगान स्वतः चालू हो जायेगा।
मै भी हैरान हूँ !!!!! क्या टेक्नोलॉजी है।

मेरे देश की धरती

मेरे देश की धरती
सोना उगले
उगले हीरे मोती

बैलों के गले में जब घुंघरू
जीवन का राग सुनाते हैं
गम कोसों दूर हो जाता है
खुशियों के कँवल मुसकाते है
सुन के रहट की आवाजें
यूं लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के
दुल्हन की तरह हर खेत सजे
मेरे देश की धरती…

जब चलते हैं इस धरती पे हल
ममता अंगडाइयाँ लेती है
क्यों ना पूजे इस माटी को
जो जीवन का सुख देती है
इस धरती पे जिसने जनम लिया
उसने ही पाया प्यार तेरा
यहाँ अपना पराया कोइ नहीं
है सब पे माँ, उपकार तेरा
मेरे देश की धरती…

ये बाग़ है गौतम नानक का
खिलते हैं अमन के फूल यहाँ
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक
ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ
रंग हरा हरी सिंह नलवे से
रंग लाल है लाल बहादूर से
रंग बना बसन्ती भगत सिंह
रंग अमन का वीर जवाहर से
मेरे देश की धरती…

तिरंगा

शोहरत ना अता करना मौला,दौलत ना अता करना मौला
बस इतना अता करना चाहे,जन्नत ना अता करना मौला
शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों मे तिरंगा हो

बस एक सदा ही उठे सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं मैं
बस एक दुआ ही उठे सदा जलते तपते सहराओं मैं
जीते जी इसका मान रखे, मारकर मर्यादा याद रहे
हम रहे कभी ना रहे मगर, इसकी सज धज आबाद रहे
गोधरा ना हो, गुजरात ना हो, इंसान ना नंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों मैं तिरंगा हो.

गीता का ज्ञान सुने ना सुने
इस धरती का यश्गान सुने
हम शबद कीर्तन सुन ना सके
भारत माँ का जय गान सुने
परवरदिगार मैं तेरे द्वार
कर लो पुकार ये कहता हूँ
चाहे अज़ान ना सुने कान पर जय जय हिन्दुस्तान सुने
जन मन मे उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
होठों पर गंगा हो
हाथों मे तिरंगा हो

जीना भी हो मरना भी हो तेरी मिट्टी की खुशबू में
हँसना भी हो रोना भी हो बस तेरे प्यार के जादू में
उस खुदा से हरदम रहे दुआ
तू खुश रहे चाहे मुझे कुछ भी हुआ
तेरी धरती अंबर से प्यारी है
समुंद्र ही लागे तेरा हर इक कुआँ
बहुत सह चुके अब और ना सहे
अब सब कुछ चंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों मैं तिरंगा हो.

कुछ माँगा नही सब पाया है धरती माँ तेरे आँचल से
सुंदरता और सुरक्षा भी मिली हे भारती तेरे हिमाचल से
एक दूसरे को अब माने भाई
चाहे हिंदू मुस्लिम हो सिख या ईसाई
एक दूसरे के लिए भी लड़े अब
और आपस मे ना करे लड़ाई
धर्म एक हो इक ही जात हो
और ना कोई दंगा हो
होठों पर गंगा हो
हाथों मे तिरंगा हो

मालूम नही किसने लिखा है, पर क्या खूब लिखा है

..

आज हम उनको बेवफा बताकर आए है! उनके खतो को पानी में बहाकर आए है . कोई निकाल न ले उन्हें पानी से… इस लिए पानी में भी आग लगा कर आए है
आज हम उनको बेवफा बताकर आए है! उनके खतो को पानी में बहाकर आए है . कोई निकाल न ले उन्हें पानी से… इस लिए पानी में भी आग लगा कर आए है

नफरतों का असर देखो,
जानवरों का बटंवारा हो गया,
गाय हिन्दू हो गयी ;
और बकरा मुसलमान हो गया.

मंदिरो मे हिंदू देखे,
मस्जिदो में मुसलमान,
शाम को जब मयखाने गया ;
तब जाकर दिखे इन्सान.
ये पेड़ ये पत्ते ये शाखें भी परेशान हो जाएं
अगर परिंदे भी हिन्दू और मुस्लमान हो जाएं

सूखे मेवे भी ये देख कर हैरान हो गए
न जाने कब नारियल हिन्दू और
खजूर मुसलमान हो गए..

न मस्जिद को जानते हैं , न शिवालों को जानते हैं
जो भूखे पेट होते हैं, वो सिर्फ निवालों को जानते हैं.

अंदाज ज़माने को खलता है.
की मेरा चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है……

मैं अमन पसंद हूँ , मेरे शहर में दंगा रहने दो…
लाल और हरे में मत बांटो ,मेरी छत पर तिरंगा रहने दो….
Swatantrata diwas ki haardik subhkaamnayein😊

घायल सैनिक का पत्र

अपने परिवारके नाम…( कारगिल युद्ध )
जय हिंद
माँ से—माँ तुम्हारा लाडला रण में अभी घायल हुआ है..
.पर देख उसकी वीरता को, शत्रु भी कायल हुआ है…
रक्त की होली रचा कर, मैं प्रलयंकारी दिख रहा हूँ …
माँ उसी शोणित से तुमको, पत्र अंतिम लिख रहा हूँ…
युद्ध भीषण था, मगर ना इंच भी पीछे हटा हूँ..
माँ तुम्हारी थी शपथ, मैं आज इंचोमें कटा हूँ…
एक गोली वक्ष पर कुछ देर पहले ही लगी है…
माँ, कसम दी थी जो तुमने, आज मैंनेपूर्ण की है…
छा रहा है सामने लो आँखों के आगे अँधेरा…
पर उसी में दिख रहा है, वह मुझे नूतन सवेरा…
कह रहे हैं शत्रु भी, मैं जिस तरह सौदा हुआ हूँ..
.लग रहा है सिंहनी के कोख से पैदा हुआ हूँ…
यह ना सोचो माँ की मैं चिर-नींद लेने जा रहा हूँ …
माँ, तुम्हारी कोख से फिर जन्म लेने आ रहा हूँ…
पिता से—मैं तुम्हे बचपन में पहले ही बहुत दुःख दे चुका हूँ…
और कंधो पर खड़ा हो, आसमां सर ले चुका हूँ..
.तू सदा कहते ना थे, कि ये ऋण तुम्हे भरना पड़ेगा.
.एक दिन कंधो पे अपने, ले मुझे चलना पड़ेगा…
पर पिता! मैं भार अपना तनिक हल्काकर ना पाया..
.ले ऋण तुम्हारा अपने कंधो मैं आजीवन भर ना पाया..
.हूँ बहुत मजबूर वह ऋण ले मुझे मरना पड़ेगा…
अंत में भी आपके कंधो मुझे चढ़ना पड़ेगा…
अनुज भाई से—सुन अनुज रणवीर, गोली बांह में जबआ समाई…
ओ मेरी दायीं भुजा! उस वक़्त तेरीयाद आयी…
मैं तुम्हे बांहों से आकास दे सकता नहीं हूँ…
लौट कर भी आऊंगा, विश्वाश दे सकतानहीं हूँ…
पर अनुज, विश्वाश रखना, मैं नहीं थक कर पडूंगा.
..तुम भरोसा पूर्ण रखना, सांस अंतिम तक लडूंगा..
अब तुम्ही को सौंपता हूँ, बस बहनाका याद रखना..
.जब पड़े उसको जरूरत, वक़्त पर सम्मान करना..
.तुम उसे कहना की रक्षा पर्व जब भीआएगा…?
भाई अम्बर में नजर आशीष देता आएगा…
पत्नी से—अंत में भी तुमसे प्रिय, मैं आज भी कुछ मांगता हूँ…
है कठिन देना मगर, निष्ठुर हृदय ही मांगता हूँ…
तुम अमर सौभाग्य की बिंदिया सदा माथे रचना..
.हाथ में चूड़ी पहन कर पाऊँ तक मेहंदी रचना…
बर्फ की ये चोटियाँ, यूँ तो बहुत शीतल लगी थी….
पर तेरे प्यार की उष्णता से, वे हिमशिला गलने लगी थी..
.तुम अकेली हो नहीं इस धैर्य को खोने ना देना…
भर उठे दुःख से हृदय, पर आँख को रोने ना देना…
सप्त पद की यात्रा से तुम मेरी अर्धांगिनी हो…
सात जन्मो तक बजे जो तुम अमर वो रागिनी हो…
इसलिए अधिकार तुमसे बिना बताये ले रहा हूँ…..
मांग का सिंदूर तेरा मातृभूमि को दे रहा हूँ…..!!!!!!!!!!–