Mobile आया

ले ले ले ले ले ले ले रे Chal बेटा Selfie ले ले रे..

⊂_ヽ
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   \( •_•)
     ⌒ヽ
   /   へ\
   /  / \\ 📷
   レ ノ   ヽ_つ
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ノ )  Lノ
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😄☺😉😎😎
📲 Mobile आया
📷 Camera खतम

📲 Mobile आया
⏰ Wrist Watch खतम

📲 Mobile आया
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📻 Radio खतम

📲 Mobile आया
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📲Mobile आया
💻 Computer खतम

📲 Mobile आया
🙇 सुकून खतम

और अगर आप का

“Mobile” 📲
आप के

बीबी के हाथ में आया, मां कसम
आप “खतम” 🔫🙅
…..🎩
@ 👀👂
( 👃 )
\ 👅 /
✋🎽c👍
👖
/ \
👞👞
एक दम नया …😜

बदलती दुनियां का ऐसा असर होने लगा,
आदमी पागल😔Aur फोन Smart होने लगा है।
😀😊


सब सीये हैं

लडके के पिता लड़की देखने गये ..

उन्होने लड़की के पिता से पूछा – लड़की क्या करती हे ??

लड़की के पिता ने जवाब दिया –
सी ए है ..

उन्होने पूछा – लड़की का भाई क्या करता है ??

लड़की का पिता – वो भी सी ए है ..

लड़के का पिता – उसकी माता जी क्या करती हैं ??


लड़की का पिता – वो भी सी ए है ..

लड़के का पिता – अरे वाह ! सब सी ए तब तो आप भी सी ए ही होगे ..
लड़की का पिता – ना ना मै तो घाघरा चोली काटु हूँ … ये सब सीये हैं ….!! 😀 😀 😉


भारत और पाकिस्तान में अंतर

भारत-

गूगल का CEO-भारतीय
माइक्रोसॉफ्ट का CEO-भारतीय
पेप्सिको का CEO-भारतीय
मास्टर कार्ड का CEO-भारतीय
डॉयचे बैंक का CO-CEO-भारतीय
जैगुआर,लैंड रोवर,रेंज रोवर के MD-भारतीय

पाकिस्तान-

अल-कायदा का CEO-पाकिस्तानी
लश्कर-ऐ-तैयबा का CEO-पाकिस्तानी
तालिबान का CEO-पाकिस्तानी
हिजबुल का CEO-पाकिस्तानी
जमात-उद-दावा का CEO-पाकिस्तानी
XYZ आतंकवादी ग्रुप्स के CEO-पाकिस्तानी !!!!!!!!! 😁😬😁😬


बड़ा महत्त्व है

” बड़ा महत्त्व है ”
—————————-
👉 ससुराल में साली का
👉 बाग में माली का
👉 होठों में लाली का
👉 पुलिस में गाली का
👉 मकान में नाली का
👉 कान में बाली का
👉 पूजा में थाली का
👉 खुशी में ताली का…. बड़ा महत्त्व है…
:
👉 फलों में आम का
👉 भगवान में राम का
👉 मयखाने में जाम का
👉 फैक्ट्री में काम का
👉 सुर्खियों में नाम का
👉 बाजार में दाम का
👉 मोहब्बत में शाम का……. बड़ा महत्त्व है.
👉 व्यापार में घाटा का
👉 लड़ाई में चांटा का
👉 रईसों में टाटा का
👉 जूत्तों में बाटा का….. बड़ा महत्त्व है

👉 फिल्म में गाने का
👉 झगड़े में थाने का
👉 प्यार में पाने का
👉 अंधों में काने का
👉 परिंदों में दाने का…….. बड़ा महत्त्व है

👉जिंदगी में मोहब्बत का
👉 परिवार में इज्जत का
👉तरक्की में किस्मत का
👉 दीवानों में हसरत का……. बड़ा महत्त्व है

👉 पंछियों में बसेरे का
👉 दुनिया में सवेरे का
👉 डगर में उजेरे का
👉 शादी में फेरे का…… बड़ा महत्त्व है

👉 खेलों में क्रिकेट का
👉 विमानों में जेट का
👉 शरीर में पेट का
👉 दूरसंचार में नेट का…… बड़ा महत्त्व है

👉 मौजों में किनारों का
👉 गुर्वतों में सहारों का
👉 दुनिया में नजारों का
👉 प्यार में इशारों का…… बड़ा महत्त्व है

👉 खेत में फसल का
👉 तालाब में कमल का
👉 उधार में असल का
👉 परीक्षा में नकल का….. बड़ा महत्त्व है

👉 ससुराल में जमाई का
👉 परदेश में कमाई का
👉 जाड़े में रजाई का
👉 दूध में मलाई का…….. बड़ा महत्त्व है

👉 बंदूक में गोली का
👉 पूजा में रोली का
👉 समाज में बोली का
👉 त्योहारों में होली का
👉 श्रृंगार में चोली का……. बड़ा महत्त्व है

👉 बारात में दूल्हे का
👉 रसोई में चूल्हे का….. बड़ा महत्त्व है

👉 सब्जियों में आलू का
👉 बिहाऱ में लालू का
👉 मशाले में बालू का
👉 जंगल में भालू का
👉 बोलने में तालू का….. बड़ा महत्त्व है

👉 मौसम में सामण का
👉 घर में आँगण का
👉 दुआ में माँगण का
👉 लंका में रावण का….. बड़ा महत्त्व है

👉 चमन में बहार का
👉 डोली में कहार का
👉 खाने में अचार का
👉 मकान में दीवार का…… बड़ा महत्त्व है

👉 सलाद में मूली का
👉 फूलों में जूली का
👉 सजा में सूली का
👉 स्टेशन में कूली का…… बड़ा महत्त्व है

👉 पकवानों में पूरी का
👉 रिश्तों में दूरी का
👉 आँखों में भूरी का
👉 रसोई में छूरी का…….. बड़ा महत्त्व है

👉 माँ की गोदी का
👉 देश में मोदी का…… बड़ा महत्त्व है

👉 खेत में सांप का
👉 सिलाई में नाप का
👉 खानदान में बाप का 👉 ……… और ………
👉 Whatsapp पर आपक….बड़ा महत्त्व है |
:
:
🙏महत्त्व कैसा लगा दोस्तो ……….👏👏
👮👮 अपने सभी दोस्तों
👮 को Forwar.d करो ||

🙏👉😋Sharad😋👈🙏


Har Har Mahadev

गुरु जी ने शिष्य से पूंछा -माता पार्वती ने भगवान शिव को वर क्यों चुना ? कारण सहित बताओ ।
शिष्य –
1-भगवान शिव कपडे नहीं पहनते थे इसलिए कपडे धोने का कोई लफढ़ा ही नहीं था ।
2-माथे पर चांद विद्यमान है ,लाइट ही लाइट बिजली जाने का डर नही।
3-जटाओं मे गंगाजी विराजती हैं पानी ही पानी , पम्प ख़राब होने की चिन्ता नहीं ।
4-कंद मूल फल जो भगवान शिव खाऐगै वही हम खाऐगे अर्थात खाना बनाने की जरूरत नही।
5-न सास न ननद मतलब कोई लडाई झगड़े का डर नहीं ।
गुरु जी सदमें में हैं ।
🍁🙏


जाति-पाती हटाओ

सरकार कहती है
जाति-पाती हटाओ
और
कानून कहता है
जाति प्रमाण
पत्र ले आओ
ये लोकतंत्र है या
षड़यंत्र है
कुछ समझ नही आता | 🙇🏼


पिंजरे का तोता

एक समय की बात हैं, एक सेठ और सेठानी रोज सत्संग में जाते थे। सेठजी के एक घर एक पिंजरे में तोता पाला हुआ था। तोता रोज सेठ-सेठानी को बाहर जाते देख एक दिन पूछता हैं कि सेठजी आप रोज कहाँ जाते है। सेठजी बोले कि भाई सत्संग में ज्ञान सुनने जाते है। तोता कहता है सेठजी फिर तो कोई ज्ञान की बात मुझे भी बताओ। तब सेठजी कहते हैं की ज्ञान भी कोई घर बैठे मिलता हैं। इसके लिए तो सत्संग में जाना पड़ता हैं। तोता कहता है कोई बात नही सेठजी आप मेरा एक काम करना। सत्संग जाओ तब संत महात्मा से एक बात पूछना कि में आजाद कब होऊंगा।
सेठजी सत्संग ख़त्म होने के बाद संत से पूछते है की महाराज हमारे घर जो तोता है उसने पूछा हैं की वो आजाद कब होगा? संत को ऐसा सुनते हीं पता नही क्या होता है जो वो बेहोश होकर गिर जाते है। सेठजी संत की हालत देख कर चुप-चाप वहाँ से निकल जाते है।
घर आते ही तोता सेठजी से पूछता है कि सेठजी संत ने क्या कहा। सेठजी कहते है की तेरे किस्मत ही खराब है जो तेरी आजादी का पूछते ही वो बेहोश हो गए। तोता कहता है कोई बात नही सेठजी में सब समझ गया।
दूसरे दिन सेठजी सत्संग में जाने लगते है तब तोता पिंजरे में जानबूझ कर बेहोश होकर गिर जाता हैं। सेठजी उसे मरा हुआ मानकर जैसे हीं उसे पिंजरे से बाहर निकालते है तो वो उड़ जाता है। सत्संग जाते ही संत सेठजी को पूछते है की कल आप उस तोते के बारे में पूछ रहे थे ना अब वो कहाँ हैं। सेठजी कहते हैं, हाँ महाराज आज सुबह-सुबह वो जानबुझ कर बेहोश हो गया मैंने देखा की वो मर गया है इसलिये मैंने उसे जैसे ही बाहर निकाला तो वो उड़ गया।
तब संत ने सेठजी से कहा की देखो तुम इतने समय से सत्संग सुनकर भी आज तक सांसारिक मोह-माया के पिंजरे में फंसे हुए हो और उस तोते को देखो बिना सत्संग में आये मेरा एक इशारा समझ कर आजाद हो गया।

इस कहानी से तात्पर्य ये है कि हम सत्संग में तो जाते हैं ज्ञान की बाते करते हैं या सुनते भी हैं, पर हमारा मन हमेशा सांसारिक बातों में हीं उलझा रहता हैं। सत्संग में भी हम सिर्फ उन बातों को पसंद करते है जिसमे हमारा स्वार्थ सिद्ध होता हैं। हमे वहां भी मान यश मिल जाये यही सोचते रहते हैं। जबकि सत्संग जाकर हमें सत्य को स्वीकार कर सभी बातों को महत्व देना चाहिये और जिस असत्य, झूठ और अहंकार को हम धारण किये हुए हैं उसे साहस के साथ मन से उतार कर सत्य को स्वीकार करना चाहिए।

~~ दिल से बोलो जी राधे राधे ~~
 

*एक कहानी जो मैंने फिर सुनी*

 

एक समय एक कछुये और एक खरगोश में इस बात पर बहस हो गई कि दोनों में कौन तेज दौड़ता है। दोनों ने तय किया कि इसका  समाधान एक दौड़ द्वारा किया जाय।  उन्होंने एक रास्ता  तय किया और दौड़ शुरु हुयी।

खरगोश आगे चल निकला और कुछ देर तेजी से दौड़ता रहा। फिर यह देख कर कि वह बहुत आगे आ गया है, उसने सोचा आगे दौड़ने के पहले किसी पेड़ के नीचे कुछ देर बैठ कर थोड़ा आराम कर ले।

वह एक पेड़ के नीचे बैठा और थोड़ी  ही देर में उसे नींद आ गयी।

कछुआ धीरे-धीरे चलता आया और उसके आगे निकल गया। उसने शीघ्र ही दौड़ समाप्त कर ली  और चैम्पियन बन गया।

खरगोश जगा और समझ गया कि वह दौड़  हार गया था।

कहानी से सीख:

धीमा किन्तु सतत्‌  कार्यरत्‌  विजयी होता है।

 

इस कहानी को ऐसे ही हम बचपन से सुनते आये हैं।

किन्तु कुछ दिन पहले मुझे किसी ने इस कहानी को एक नये और अधिक रुचिकर रूप में सुनाया।

यह इस प्रकार है…………

खरगोश दौड़  हार जाने से निराश था। उसने हार का दोष निवारण –  मूल कारण –  का विश्लेषण किया।उसने पाया कि वह दौड़ इसलिये हार गया क्योंकि वह अतिविश्वासी,लापरवाह और आलसी था।

यदि उसने अपनी जीत पहले से ही सुनिश्चित न मान ली होती, तो किसी तरह भी कछुआ उसे हरा न पाता। अत: उसने कछुये को दूसरी दौड़  के लिये चुनौती दी। कछुये ने इसे स्वीकार कर लिया।

इस बार खरगोश पूरी मुस्तैदी से दौड़ा  और बिना कहीं रुके हुये शुरू से अन्त तक दौड़ गया।

वह मीलों से जीत गया।

 

इस कहानी की सीख है:

“तेज और संगत कार्य करने वाला

व्यक्ति धीमे और दृढ़-संकल्प के साथ       काम करने वाले व्यक्ति को पीछे छोड़ देता है। ” 

यदि किसी संगठन में दो व्यक्ति हों; एक, व्यवस्थित एवं विश्वसनीय, किन्तु धीमा, तथा दूसरा, तेज और विश्वसनीय भी, तो तेज और विश्वसनीय व्यक्ति संगठनात्मक सीढ़ी धीमे,व्यवस्थित एवं विश्वसनीय व्यक्ति की अपेक्षा  तेजी से चढ़े  गा।

धीमा, व्यवस्थित एवं विश्वसनीय व्यक्ति अच्छा है; किन्तु तेज और विश्वसनीय व्यक्ति उससे बेहतर होता है।

किन्तु कहानी यहीं खत्म नहीं हो जाती।

कछुआ ने स्थिति पर विचार किया और पाया कि दौड़ के वर्तमान प्रारूप में वह खरगोश से किसी भी प्रकार जीत नहीं सकता। वह इस पर कुछ समय विचार करता रहा, और तब उसने खरगोश को एक थोड़े से अलग मार्ग पर दौड़ने के लिये ललकारा।

खरगोश ने इसे स्वीकार कर लिया।

दौड़ शुरू हुयी।

अपनी स्वयं की वचनबद्धता के साथ कि वह विश्वसनीय रूप से लगातार तेज दौड़ेगा, खरगोश ने दौड़ना शुरू किया और अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ता रहा जब तक कि वह एक चौड़ी नदी के किनारे नहीं पहुंच गया।

दौड़ पूरी होने वाली रेखा नदी के उस पार काफी आगे थी।

खरगोश बैठा-बैठा सोचने लगा कि अब क्या करे?

इस बीच कछुआ धीरे-धीरे ऊँचे-नीचे चलते-चलते पहुँच आया,नदी में घुसा, तैर कर दूसरी ओर गया और चल कर दौड़ पूरी कर ली।

 

इस कहानी से सीख?

“सबसे पहले अपनी विशेष – मुख्य क्षमता को पहचानिये और फिर खेल मैदान – कार्य क्षेत्र एवं शर्तों में – इस क्षमता के अनुसार परिवर्तन करिये।“

किसी समूह में, यदि आप एक अच्छे वक्ता हैं, ऐसे अवसर पैदा करिये जिसमें प्रस्तुतीकरण हों  और जिनके माध्यम से आप अपने वरिष्ठ अधिकरियों की नज़र में आ जायें।

यदि आप की ताकत विश्लेषण है, आप अनुसंधान का काम चुनिये, आख्या तैयार कीजिये और ऊपर भेजिये।

अपनी क्षमताओं के अनुरूप कार्य करने से आप न केवल अपने अधिकारियों की नज़र में आयेंगे बल्कि आप को विकसित होने तथा आगे बढ़ने के अनेक सुअवसर मिलें गे।

 

किन्तु कहानी अभी समाप्त नहीं हुयी है………

खरगोश और कछुआ अब तक काफी अच्छे दोस्त बन गये थे। दोनों ने मिलकर सोच विचार किया।

दोनों ने समझा कि पिछली दौड़ बेहतर दौड़ी जा सकती थी।

अत: उन्होंने तय किया कि आख़िरी दौड़ वे फिर से दौड़ेगे, पर इस बार एक टीम की भांति।

उन्होंने दौड़ शुरू की।

इस समय खरगोश कछुआ को अपनी पीठ पर नदीं के किनारे तक ले गया।

वहाँ से कछुआ ने प्रारम्भ किया। खरगोश को अपनी पीठ पर बैठाया और तैर कर दूसरे किनारे पहुँच गया।

नदी के दूसरे किनारे पहुँच कर खरगोश ने फिर कछुआ को अपनी पीठ पर बैठाया और दौड़ गया। अन्तिम रेखा पर दोनों साथ पहुँचे।

दोनों ने पहले की अपेक्षा बेहतर सन्तोष का अनुभव किया।

इस कहानी मिलने वाली सीख:

व्यक्तिगत रूप से प्रतिभाशाली होना तथा सशक्त मुख्य क्षमता रखना अच्छा है; किन्तु जब तक आप एक टीम के रूप में कार्य करने की क्षमता विकसित नहीं करते और टीम के अन्य सदस्यों की मुख्य क्षमताओं को स्वीकारते हुये उनका उपयोग करना नहीं सीखते आप सदैव अपनी क्षमता से कम परिणाम प्राप्त करेंगे क्योंकि सदैव ऐसी परिस्थितियाँ आयें गी जब आप अच्छा न कर सकें और दूसरा आप से बेहतर करने की क्षमता रखता हो।

टीम कार्य मुख्यत: स्थितिपरक नेतृत्व से सम्बन्धित है, जिसमें विशेष  क्षमता वाले व्यक्ति को  परिस्थिति विशेष में कार्य का नेतृत्व सौंप दिया जाता है।

 

इस कहानी से कई अन्य सीखें भी मिलती हैं………

ध्यान देने योग्य बात है कि न तो खरगोश ने और न ही कछुआ ने असफलता के बाद अपनी हार मान ली।

खरगोश ने असफलता के बाद अधिक मेहनत और लगन से कार्य किया।

कछुआ अपनी क्षमता के अनुरूप पहले से ही कार्य कर रहा था, अत: उसने अपनी योजना – Strategy – बदल दी।

जीवन में, जब असफलता की सम्भावना दिखे, अधिक मेहनत और लगन से कार्य करना उपयुक्त हो सकता है।

कभी-कभी कार्य योजना बदल कर कुछ भिन्न करना उपयुक्त हो सकता है। और कभी-कभी दोनों करना आवश्यक हो सकता है।

खरगोश और कछुआ ने एक दूसरी महत्वपूर्ण शिक्षा ग्रहण की:

“जब हम व्यक्ति विशेष से प्रतिस्पर्धा बन्द करके परिस्थिति से प्रतिस्पर्धा करना शुरू करते हैं तो हम बेहतर परिणाम प्राप्त करते हैं।“

सार रूप में, खरगोश और कछुआ की कहानी हमें कई सबक सिखाती है; उनमें से मुख्य हैं:

– तेज और विश्वसनीय सदैव धीमे और सतत कार्यरत को पीछे छोड देगा।

–  अपनी क्षमताओं के अनुरूप कार्य करिये।

– संसाधनों को एक साथ लेकर और एक टीम के रूप कार्य करने वाले अलग-अलग कार्य करने वालों को सदैव पीछे छोड़ देंगे।

–  असफलता के सामने कभी भी निराश मत होइये; और,अन्तिम,

-परिस्थिति के विरुद्ध प्रितिस्पर्धा करिये न कि प्रतिद्वनन्दी के विरुद्ध।


मेरे देश की धरती

मेरे देश की धरती
सोना उगले
उगले हीरे मोती

बैलों के गले में जब घुंघरू
जीवन का राग सुनाते हैं
गम कोसों दूर हो जाता है
खुशियों के कँवल मुसकाते है
सुन के रहट की आवाजें
यूं लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के
दुल्हन की तरह हर खेत सजे
मेरे देश की धरती…

जब चलते हैं इस धरती पे हल
ममता अंगडाइयाँ लेती है
क्यों ना पूजे इस माटी को
जो जीवन का सुख देती है
इस धरती पे जिसने जनम लिया
उसने ही पाया प्यार तेरा
यहाँ अपना पराया कोइ नहीं
है सब पे माँ, उपकार तेरा
मेरे देश की धरती…

ये बाग़ है गौतम नानक का
खिलते हैं अमन के फूल यहाँ
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक
ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ
रंग हरा हरी सिंह नलवे से
रंग लाल है लाल बहादूर से
रंग बना बसन्ती भगत सिंह
रंग अमन का वीर जवाहर से
मेरे देश की धरती…


तिरंगा

शोहरत ना अता करना मौला,दौलत ना अता करना मौला
बस इतना अता करना चाहे,जन्नत ना अता करना मौला
शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों मे तिरंगा हो

बस एक सदा ही उठे सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं मैं
बस एक दुआ ही उठे सदा जलते तपते सहराओं मैं
जीते जी इसका मान रखे, मारकर मर्यादा याद रहे
हम रहे कभी ना रहे मगर, इसकी सज धज आबाद रहे
गोधरा ना हो, गुजरात ना हो, इंसान ना नंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों मैं तिरंगा हो.

गीता का ज्ञान सुने ना सुने
इस धरती का यश्गान सुने
हम शबद कीर्तन सुन ना सके
भारत माँ का जय गान सुने
परवरदिगार मैं तेरे द्वार
कर लो पुकार ये कहता हूँ
चाहे अज़ान ना सुने कान पर जय जय हिन्दुस्तान सुने
जन मन मे उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
होठों पर गंगा हो
हाथों मे तिरंगा हो

जीना भी हो मरना भी हो तेरी मिट्टी की खुशबू में
हँसना भी हो रोना भी हो बस तेरे प्यार के जादू में
उस खुदा से हरदम रहे दुआ
तू खुश रहे चाहे मुझे कुछ भी हुआ
तेरी धरती अंबर से प्यारी है
समुंद्र ही लागे तेरा हर इक कुआँ
बहुत सह चुके अब और ना सहे
अब सब कुछ चंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों मैं तिरंगा हो.

कुछ माँगा नही सब पाया है धरती माँ तेरे आँचल से
सुंदरता और सुरक्षा भी मिली हे भारती तेरे हिमाचल से
एक दूसरे को अब माने भाई
चाहे हिंदू मुस्लिम हो सिख या ईसाई
एक दूसरे के लिए भी लड़े अब
और आपस मे ना करे लड़ाई
धर्म एक हो इक ही जात हो
और ना कोई दंगा हो
होठों पर गंगा हो
हाथों मे तिरंगा हो


भगवान से डरो बहनजी

महिला: भैया सही रेट लगाओ हम हमेशा यही से सामान ले जाते है

📀 दुकानदार:भगवान से डरो बहनजी अभी कल ही इस दुकान की ओपनिंग हुई है😜😜😜😜